जनवरी 2025 करंट अफेयर्स | UPSC, BPSC, SSC, Railway के लिए One Shot
Current Affairs 2025 | Daily, Weekly, Monthly for UPSC, BPSC, SSC, CTET, Banking
सहकारिता: एक विस्तृत व्याख्या
परिचय:
सहकारिता का मतलब है – साझे हितों के लिए मिलकर काम करना। यह एक ऐसी व्यवस्था है जिसमें लोग अपनी छोटी-छोटी पूंजी, संसाधन और मेहनत को मिलाकर एक संगठन बनाते हैं, जिससे वे सभी को लाभ पहुँचा सकें।
अंतरराष्ट्रीय सहकारी वर्ष 2025 (IYC 2025):
घोषणा: जून 2024 में संयुक्त राष्ट्र महासभा द्वारा की गई।
थीम: "Cooperatives Build a Better World" – सहकारी समितियाँ एक बेहतर दुनिया बनाती हैं।
उद्देश्य:
सहकारिता के माध्यम से सतत विकास को प्रोत्साहित करना।
युवाओं को इस आंदोलन से जोड़ना।
सहकारी संस्थाओं के लिए नीतियों और कानूनों को सुधारना।
सहकारी समिति क्या होती है?
यह एक ऐसा संगठन है जिसमें लोग स्वेच्छा से जुड़ते हैं, ताकि सभी का आर्थिक और सामाजिक भला हो।
इसका मूल उद्देश्य है स्व-सहायता और पारस्परिक सहायता।
इसमें “एक व्यक्ति, एक वोट” का सिद्धांत लागू होता है – यानी हर सदस्य को बराबर का अधिकार मिलता है।
भारत में सहकारिता आंदोलन:
शुरुआत: 1904 में Cooperative Credit Societies Act के जरिए।
वर्तमान स्थिति:
भारत में दुनिया की 27% सहकारी समितियाँ हैं।
लगभग 20% भारतीय इससे सीधे जुड़े हैं।
मुख्य क्षेत्र: डेयरी, आवास, प्राथमिक कृषि ऋण समितियाँ (PACS)।
सर्वाधिक सक्रिय राज्य: महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक आदि।
संवैधानिक स्थिति:
97वें संशोधन (2011):
अनुच्छेद 19(1)(c) में सहकारिता को मौलिक अधिकार बनाया गया।
अनुच्छेद 43B में इसे राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों में शामिल किया गया।
संविधान में IX-B भाग जोड़ा गया, जिसमें अनुच्छेद 243ZH से 243ZT तक सहकारी समितियों की शासन व्यवस्था शामिल है।
सहकारी बैंकों की भूमिका:
ये सामान्य बैंकों की तरह होते हैं लेकिन सहकारी सिद्धांतों पर चलते हैं।
ये ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आम लोगों को सस्ता कर्ज देते हैं।
सहकारिता का महत्व:
सामाजिक समरसता: मिल-जुलकर काम करने की भावना पैदा करता है।
नेतृत्व विकास: गाँवों में नेतृत्व और निर्णय लेने की क्षमता को बढ़ाता है।
आर्थिक आत्मनिर्भरता: गरीबों और किसानों को साहूकारों से छुटकारा दिलाता है।
रोजगार: ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार के अवसर बढ़ते हैं।
समानता: सभी को बराबर का अधिकार और लाभ मिलता है।
मुख्य चुनौतियाँ:
राजनीतिक हस्तक्षेप और भ्रष्टाचार
अल्पविकसित राज्यों में कमजोर पहुँच
तकनीकी ज्ञान और डिजिटल साक्षरता की कमी
प्रशिक्षित कर्मचारियों की कमी
सरकार की प्रमुख पहलें:
राष्ट्रीय सहकारी विकास निगम (NCDC) – 1963: सहकारिता को आर्थिक मदद देने वाली संस्था।
सहकारिता मंत्रालय – 2021: पहली बार केंद्र में अलग मंत्रालय।
सहकार-से-समृद्धि नीति: PACS को अनाज गोदाम और खाद्य आपूर्ति से जोड़ना।
श्वेत क्रांति 2.0: डेयरी क्षेत्र में महिलाओं को सशक्त बनाना।
राष्ट्रीय सहकारी डाटाबेस: पूरे देश में सहकारी समितियों का डिजिटल डेटा।
आगे का रास्ता: सुधार के सुझाव
कमजोर समितियों का विलय करके मजबूत संगठन बनाना।
बहुउद्देश्यीय सहकारी समितियाँ बनाना।
डिजिटल टूल्स जैसे बैंकिंग ऐप्स और डेटा मैनेजमेंट सिस्टम अपनाना।
सहकारी समितियों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाना (जैसे RTI लागू करना)।
1. नीति आयोग के 10 वर्ष (2015-2025): विस्तार से व्याख्या
परिचय:
नीति आयोग (NITI Aayog) भारत सरकार का एक शीर्ष थिंक टैंक है, जिसे 1 जनवरी 2015 को योजना आयोग (Planning Commission) की जगह बनाया गया था। इसका उद्देश्य भारत में नीति-निर्माण को अधिक समावेशी, लचीला और साक्ष्य-आधारित बनाना है।
मुख्य बिंदु:
नीति आयोग का पूरा नाम है: National Institution for Transforming India (NITI) Aayog।
यह एक विचार-प्रधान संस्था (Think Tank) है, न कि धन आवंटन करने वाली संस्था।
इसकी संरचना:
अध्यक्ष: भारत के प्रधानमंत्री
उपाध्यक्ष: प्रधानमंत्री द्वारा नियुक्त
सीईओ: भारत सरकार के सचिव स्तर के अधिकारी
पूर्णकालिक व अंशकालिक सदस्य
क्षेत्रीय परिषदें (Inter-State Coordination के लिए)
10 वर्षों की प्रमुख उपलब्धियाँ:
SDG India Index और Aspirational Districts Programme जैसे डाटा-आधारित कार्यक्रम।
Atal Innovation Mission (AIM) के ज़रिए स्टार्टअप संस्कृति को प्रोत्साहन।
साक्ष्य आधारित नीति निर्माण के लिए ‘India @75’, ‘Strategy for New India @75’ जैसे दस्तावेज़।
COE (Centre of Excellence) और साझेदार संस्थानों के साथ रिसर्च बढ़ाना।
महत्व:
यह राज्यों की भागीदारी के सिद्धांत पर आधारित है (Cooperative Federalism)।
नीति आयोग ने योजनाओं में Top-down approach की जगह Bottom-up दृष्टिकोण को बढ़ावा दिया।
भविष्य की दिशा:
Emerging technologies, AI, Green Hydrogen, आदि में नीति निर्धारण।
नीति आयोग को और भी कुशल और निष्पक्ष सलाहकार संस्था के रूप में विकसित करना।
2. लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013: शिक्षण योग्य विश्लेषण
परिचय:
भारत में उच्च स्तर पर भ्रष्टाचार से निपटने के लिए ‘लोकपाल और लोकायुक्त अधिनियम 2013’ पारित किया गया। यह जन लोकपाल आंदोलन के बाद आया।
मुख्य प्रावधान:
लोकपाल: केंद्र स्तर पर शिकायतों की जांच करता है।
लोकायुक्त: राज्यों में लोकसेवकों के विरुद्ध जांच करता है।
लोकपाल में:
अध्यक्ष (पूर्व न्यायाधीश)
अधिकतम 8 सदस्य (आधे न्यायिक होने चाहिए)
लोकपाल को CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) जैसी एजेंसियों को जांच के आदेश देने का अधिकार है।
संशोधन 2016:
विपक्ष का नेता नहीं होने पर सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी के नेता को चयन समिति में स्थान देने का प्रावधान जोड़ा गया।
महत्व:
यह एक स्वतंत्र और निष्पक्ष संस्था है।
यह पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ाने की दिशा में मील का पत्थर है।
3. भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI): 75वां स्थापना वर्ष
परिचय:
भारतीय निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसकी स्थापना 25 जनवरी 1950 को हुई थी।
प्रावधान:
अनुच्छेद 324 से 329 तक आयोग की शक्तियों और जिम्मेदारियों का उल्लेख है।
2011 से 25 जनवरी को राष्ट्रीय मतदाता दिवस मनाया जाता है।
भूमिका:
स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव कराना।
आदर्श आचार संहिता लागू करना।
चुनावी सुधारों के लिए सिफारिशें देना।
चुनौतियाँ:
पैसे और बाहुबल का प्रभाव।
फर्जी खबरों और सोशल मीडिया के दुष्प्रभाव।
चुनावी खर्च पारदर्शिता की कमी।
4. इंटरनेट शटडाउन (Internet Shutdown): भारत की स्थिति
मुख्य तथ्य:
2024 में भारत में 60 बार इंटरनेट बंद किया गया (2023 में 96 बार हुआ था)।
सबसे ज़्यादा शटडाउन मणिपुर और जम्मू-कश्मीर में होते हैं।
कानूनी आधार:
CRPC की धारा 144 और टेलिग्राफ एक्ट की धारा 5(2) के तहत इंटरनेट बंदी लागू की जाती है।
समस्याएं:
सूचना का अधिकार बाधित होता है।
छात्रों, कारोबारियों और मरीजों को भारी नुकसान होता है।
डिजिटल इंडिया की दिशा में रुकावट।
समाधान:
वैकल्पिक उपायों को अपनाना।
न्यायिक निगरानी और पारदर्शी प्रक्रिया।
“इंटरनेट को मौलिक अधिकार” मानने की ओर बढ़ना।
5. जलवायु वार्ता में संस्थाओं की भूमिका
समाचार में क्यों:
CoP-29 (UNFCCC) में विकसित और विकासशील देशों के बीच जलवायु वित्त को लेकर विवाद।
संस्थाओं की भूमिका:
UNFCCC, IPCC, GCF, Adaptation Fund जैसी संस्थाएं जलवायु से संबंधित निर्णयों और क्रियान्वयन में मदद करती हैं।
ये संस्थाएं:
पारदर्शिता सुनिश्चित करती हैं
नवाचार को प्रोत्साहित करती हैं
जलवायु न्याय को बढ़ावा देती हैं
भारत की भूमिका:
भारत ने “LiFE Mission”, ISA (International Solar Alliance) और G20 के अध्यक्षता में हरित विकास को बढ़ावा दिया है।
6. WPI के आधार वर्ष की समीक्षा (WPI Base Year Revision)
परिचय:
WPI (Wholesale Price Index – थोक मूल्य सूचकांक) एक ऐसा आर्थिक संकेतक है जो किसी निर्धारित अवधि में वस्तुओं की थोक कीमतों में आए परिवर्तन को मापता है। यह मुद्रास्फीति की गणना का एक प्रमुख माध्यम है।
समाचार में क्यों:
भारत सरकार ने WPI के आधार वर्ष को 2011-12 से बदलकर 2022-23 करने हेतु एक कार्यसमूह का गठन किया है।
प्रमुख तथ्य:
नीति आयोग के सदस्य प्रो. रमेश चंद इस कार्यसमूह के अध्यक्ष हैं।
यह समूह:
WPI की गणना व प्रस्तुति में सुधार करेगा।
WPI की जगह PPI (Producer Price Index) को लागू करने की रूपरेखा बनाएगा।
मूल्य एकत्र करने की वर्तमान प्रणाली और गणना पद्धति की समीक्षा करेगा।
WPI और PPI में अंतर:
WPI: थोक स्तर पर वस्तुओं की कीमतों को मापता है।
PPI: निर्माता को मिलने वाली कीमतों को दर्शाता है – यह वैश्विक मानकों के अधिक अनुरूप है।
महत्व:
नया आधार वर्ष अधिक आधुनिक और यथार्थ आंकड़े देगा।
यह नीति निर्धारण को अधिक डेटा आधारित और उत्तरदायी बनाएगा।
7. विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO): भूमिका और कार्य
परिचय:
WHO संयुक्त राष्ट्र की एक एजेंसी है जो वैश्विक स्वास्थ्य मामलों के लिए कार्य करती है। इसकी स्थापना 1948 में जिनेवा (स्विट्ज़रलैंड) में हुई थी।
मुख्य कार्य:
संक्रामक और गैर-संक्रामक बीमारियों पर नियंत्रण।
स्वास्थ्य से जुड़े वैश्विक मानक बनाना।
देशों को तकनीकी सहायता और प्रशिक्षण देना।
स्वास्थ्य आंकड़ों और रिपोर्टों का संकलन।
वर्तमान भूमिका:
टीकाकरण, महामारी नियंत्रण, पोषण, मानसिक स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन से जुड़े स्वास्थ्य प्रभावों पर WHO सक्रिय है।
WHO द्वारा जारी रिपोर्टें, जैसे World Health Statistics, नीति-निर्माताओं के लिए आधार बनती हैं।
8. डिजिटल व्यक्तिगत डेटा संरक्षण नियम 2025 (Draft DPDP Rules)
पृष्ठभूमि:
2017 में के.एस. पुट्टस्वामी बनाम भारत संघ मामले में सुप्रीम कोर्ट ने निजता को मौलिक अधिकार घोषित किया।
इसी संदर्भ में DPDP अधिनियम, 2023 पारित किया गया, और अब 2025 में उसके नियमों का ड्राफ्ट जारी किया गया है।
मुख्य बातें:
इन नियमों का उद्देश्य व्यक्तिगत डेटा के संग्रह, प्रसंस्करण, और उपयोग को नियंत्रित करना है।
MeitY (Ministry of Electronics and IT) ने नियम तैयार किए हैं।
यह नियम व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा और नागरिकों की प्राइवेसी सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम हैं।
9. वायु गुणवत्ता रिपोर्ट (BUR-4 के तहत)
प्रस्तुति:
भारत ने अपनी चौथी द्विवार्षिक रिपोर्ट (BUR-4) UNFCCC को सौंपी जिसमें जलवायु परिवर्तन से जुड़ी प्रगति दिखाई गई है।
मुख्य आंकड़े:
2019 की तुलना में 2020 में GHG उत्सर्जन में 7.93% की गिरावट आई।
ऊर्जा क्षेत्र सबसे बड़ा योगदानकर्ता (75.66%)।
उत्सर्जन तीव्रता (Emission Intensity) 2005 से 2020 के बीच 36% घटी।
कार्बन सिंक निर्माण:
2005 से 2021 तक भारत ने 2.29 बिलियन टन CO2 के बराबर कार्बन अवशोषित किया है।
वर्तमान में भारत का 25.17% क्षेत्र वनाच्छादित है और लगातार वृहत हो रहा है।
महत्व:
यह रिपोर्ट भारत की जलवायु प्रतिबद्धताओं में पारदर्शिता और जिम्मेदारी दर्शाती है।
यह भारत को जलवायु नेतृत्व की दिशा में सशक्त बनाती है।
11. INS सूरत, INS नीलगिरि और INS वाघशीर – भारतीय नौसेना की नई ताकत
समाचार में क्यों?
प्रधानमंत्री ने पहली बार एक साथ तीन प्रकार के नौसैनिक प्लेटफॉर्म – विध्वंसक (Destroyer), फ्रिगेट (Frigate), और पनडुब्बी (Submarine) – को राष्ट्र को समर्पित किया।
तीनों युद्धपोतों का परिचय:
INS सूरत:
P15B प्रोजेक्ट का चौथा और अंतिम गाइडेड मिसाइल विध्वंसक जहाज़।
भारतीय नौसेना की स्वदेशी युद्धपोत निर्माण की क्षमता का प्रतीक।
INS नीलगिरि:
Project 17A का पहला स्टील्थ फ्रिगेट।
स्वदेशी डिज़ाइन – वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो द्वारा विकसित।
INS वाघशीर:
स्कॉर्पीन-क्लास (Kalvari-class) पनडुब्बी – फ्रांसीसी डिज़ाइन पर आधारित।
मझगांव डॉक लिमिटेड द्वारा निर्मित – Project 75 की छठी और अंतिम पनडुब्बी।
महत्व:
भारतीय नौसेना की आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम।
समुद्री सुरक्षा और स्ट्रैटेजिक प्रभुत्व को मजबूती।
12. भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था – भविष्य की रीढ़
डिजिटल अर्थव्यवस्था का मतलब:
एक ऐसी अर्थव्यवस्था जो डिजिटल तकनीकों जैसे इंटरनेट, मोबाइल ऐप्स, डिजिटल भुगतान, और डेटा पर आधारित हो।
भारत की स्थिति:
UPI (Unified Payments Interface) और डिजिलॉकर जैसे प्लेटफॉर्म ने डिजिटल लेनदेन को बढ़ावा दिया है।
स्टार्टअप और AI आधारित सेवाओं की वृद्धि।
भारत सरकार के कार्यक्रम:
डिजिल इंडिया मिशन
ONDC (Open Network for Digital Commerce)
डिजिटल यूनिवर्सिटी और स्वास्थ्य कार्ड
लाभ:
भ्रष्टाचार में कमी, पारदर्शिता में वृद्धि।
छोटे कारोबारियों को नए बाज़ार मिले।
रोज़गार और नवाचार को बढ़ावा।
13. ऑक्सफैम रिपोर्ट 2024 – बढ़ती आर्थिक असमानता
मुख्य निष्कर्ष:
दुनिया के 5 सबसे अमीर व्यक्तियों की संपत्ति 2020 से दोगुनी हो गई।
भारत में उच्चतम 1% आबादी के पास कुल संपत्ति का बहुत बड़ा हिस्सा है।
महिलाएं और श्रमिक वर्ग सबसे अधिक प्रभावित।
समस्याएं:
शिक्षा, स्वास्थ्य, और भोजन की असमान उपलब्धता।
आर्थिक वृद्धि का लाभ सिर्फ अमीरों तक सीमित।
सुझाव:
वित्तीय पुनर्वितरण (Redistribution of Wealth)
बड़े कॉर्पोरेशनों पर टैक्स।
सार्वजनिक शिक्षा और स्वास्थ्य में निवेश।
14. जीनोम इंडिया परियोजना – भारतीय विविधता की वैज्ञानिक पहचान
परियोजना का उद्देश्य:
देश के 10,000 नागरिकों का DNA अनुक्रमण (Genome Sequencing) करना, जिससे रोगों की प्रवृत्ति और अनुवांशिक विविधताओं को समझा जा सके।
लाभ:
निजीकृत चिकित्सा (Personalized Medicine) में मदद।
कैंसर, हृदय रोग, मधुमेह जैसे रोगों की पहचान और रोकथाम में सहायता।
भारतीय जनसंख्या की विविधता का वैज्ञानिक अध्ययन।
संबंधित संस्थान:
IISc बेंगलुरु, CSIR, AIIMS सहित कई विश्वविद्यालय।
15. भारत में लौह युग (Iron Age) – नई खोजें और ऐतिहासिक महत्त्व
समाचार में क्यों:
तामिलनाडु में खुदाई के दौरान पता चला कि भारत में लौह युग की शुरुआत 3345 ईसा पूर्व में हुई थी, जो अब तक की मान्यता से कहीं पहले की है।
महत्वपूर्ण स्थल:
आदिचनल्लूर, वसिगलाई, थलुगनूर आदि।
महत्व:
यह खोज इस विचार को चुनौती देती है कि लौह प्रौद्योगिकी पहले अनातोलिया (तुर्की) में विकसित हुई।
भारत में स्वदेशी धातु प्रौद्योगिकी की पुष्टि होती है।
संस्थान:
तमिलनाडु पुरातत्व विभाग, ASI, विभिन्न विश्वविद्यालय।
16. राष्ट्रीय डिजिटल स्वास्थ्य मिशन (NDHM) – हेल्थ सेक्टर की क्रांति
परिचय:
NDHM भारत सरकार की एक पहल है जिसका उद्देश्य डिजिटल माध्यम से हेल्थ रिकॉर्ड्स को एकीकृत करना है।
मुख्य विशेषताएँ:
हर नागरिक को मिलेगा Health ID कार्ड।
डॉक्टर, अस्पताल, और प्रयोगशालाएं एकीकृत सिस्टम से जुड़ेंगी।
मरीज कहीं भी जाकर अपनी हेल्थ हिस्ट्री दिखा सकेगा।
लाभ:
सुलभ और सटीक इलाज।
सरकारी योजनाओं का सही लाभ मिल सकेगा।
मेडिकल फाइल्स की भूलभुलैया खत्म होगी।
तकनीकी आधार:
यह मिशन आधार कार्ड, मोबाइल नंबर, और डिजिलॉकर से जुड़ा है।
17. UDISE+ रिपोर्ट 2023-24 – स्कूली शिक्षा की तस्वीर
परिचय:
UDISE+ यानी Unified District Information System for Education Plus – देश में शिक्षा से जुड़े डेटा को ऑनलाइन रूप में संग्रहीत करने की प्रणाली।
मुख्य निष्कर्ष:
2023-24 में 24.8 करोड़ छात्र स्कूलों में नामांकित (पिछले वर्ष से कमी)।
ड्रॉपआउट रेट सबसे ज़्यादा कक्षा 9-12 में।
प्रारंभिक कक्षाओं (कक्षा 1-2) में शून्य ड्रॉपआउट – आंगनवाड़ी बच्चों का सीधे प्रवेश।
GER (Gross Enrollment Ratio):
माध्यमिक स्तर को छोड़कर अन्य स्तरों पर मामूली वृद्धि।
चुनौतियाँ:
उत्तर प्रदेश, बिहार, महाराष्ट्र में सबसे अधिक गिरावट।
कुछ राज्यों में स्कूलों का कम उपयोग।
महत्त्व:
यह रिपोर्ट NEP 2020 की दिशा में प्रगति का मापदंड है।
18. तीसरा लॉन्च पैड – ISRO की नई अंतरिक्ष छलांग
समाचार में क्यों:
ISRO ने आंध्र प्रदेश के श्रीहरिकोटा में तीसरे लॉन्च पैड का निर्माण शुरू किया है – यह भारत के बढ़ते अंतरिक्ष कार्यक्रम को समर्पित है।
मुख्य उद्देश्य:
भारत के Reusable Launch Vehicle (RLV) और Gaganyaan Mission को समर्थन देना।
अधिक रॉकेट लॉन्च करने की क्षमता बढ़ेगी।
महत्त्व:
भारत अब अधिक वाणिज्यिक और वैज्ञानिक उपग्रह भेज सकेगा।
निजी कंपनियों को भी लॉन्च की सुविधा मिलेगी।
19. कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के लिए फ्रेमवर्क – भारत की रणनीति
परिचय:
भारत सरकार ने AI नीति के लिए एक रूपरेखा बनाई है ताकि इसका उत्तरदायी और सुरक्षित उपयोग हो।
प्रमुख सिद्धांत:
AI Ethics (नैतिकता), सुरक्षा, पारदर्शिता।
AI को बाल हितैषी और समावेशी बनाने पर जोर।
बच्चों, युवाओं, और गरीब वर्गों को डिजिटल सशक्तिकरण।
लाभ:
AI के कारण शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि जैसे क्षेत्रों में सुधार।
स्टार्टअप और नवाचार को बढ़ावा।
20. भारत में फसल-कटाई के त्यौहार – कृषि और संस्कृति का संगम
परिचय:
फसल-कटाई के त्यौहार किसानों की मेहनत का उत्सव हैं। ये प्राकृतिक ऋतुओं और पारंपरिक जीवनशैली से जुड़े होते हैं।
प्रमुख त्यौहार:
लोहड़ी (पंजाब): सर्दी के अंत और नई फसल की शुरुआत का उत्सव।
मकर संक्रांति (उत्तर भारत): सूर्य के उत्तरायण में जाने का प्रतीक; शुभ कार्यों की शुरुआत।
पोंगल (तमिलनाडु): चार दिवसीय कृषि पर्व – सूर्य देव को धन्यवाद।
भीमथड़ी जत्रा (महाराष्ट्र): महिलाएं, बैलगाड़ियां, पारंपरिक लोक जीवन।
महत्त्व:
सामाजिक समरसता और पारिवारिक मिलन का अवसर।
कृषि संस्कृति और जैव विविधता का सम्मान।
21. मैन्युफैक्चर्ड सैंड (M-Sand) – रेत का पर्यावरण अनुकूल विकल्प
परिचय:
मैन्युफैक्चर्ड सैंड (M-Sand) प्राकृतिक नदी रेत का विकल्प है, जिसे पत्थरों को तोड़कर मशीन द्वारा तैयार किया जाता है।
महत्त्व:
नदी से रेत खनन पर पर्यावरणीय प्रतिबंध बढ़ने के बाद इसकी मांग तेजी से बढ़ी है।
निर्माण क्षेत्र को सस्टेनेबल बनाने में सहायक।
लाभ:
गुणवत्ता नियंत्रित होती है।
किफायती और स्थायी विकल्प।
जंगलों, नदी तटों और जलजीवों की रक्षा।
भारत में स्थिति:
कर्नाटक, तमिलनाडु और महाराष्ट्र जैसे राज्यों ने इसके उत्पादन और उपयोग को बढ़ावा दिया है।
22. सुकन्या समृद्धि योजना – बेटियों के भविष्य की बचत योजना
परिचय:
यह योजना बेटियों के लिए विशेष बचत योजना है जिसे भारत सरकार ने 2015 में बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ अभियान के तहत शुरू किया।
मुख्य विशेषताएँ:
10 वर्ष से कम उम्र की बेटियों के लिए खाता खोला जा सकता है।
न्यूनतम जमा राशि – ₹250, अधिकतम – ₹1.5 लाख प्रति वर्ष।
सरकार द्वारा निर्धारित ब्याज दर – लगभग 8% के आसपास (परिवर्तनीय)।
कर में छूट: धारा 80C के तहत।
मैच्योरिटी – बेटी के 21 वर्ष की होने पर या विवाह के समय।
लाभ:
सुरक्षित और सुनिश्चित रिटर्न।
बेटी के शिक्षा और विवाह की तैयारी में आर्थिक सहायता।
23. कंपाला घोषणा-पत्र – वैश्विक दक्षिण की आवाज
समाचार में क्यों:
अलायंस फॉर पीपुल्स एजेन्डा द्वारा 2024 में कंपाला (युगांडा) में यह घोषणा की गई।
मुख्य बातें:
यह घोषणा-पत्र वैश्विक दक्षिण के देशों की एकजुटता को दर्शाता है।
इसमें औपनिवेशिक आर्थिक ढांचे के प्रतिरोध और स्वतंत्र नीति निर्माण की बात की गई है।
महत्त्व:
भारत जैसे देशों को स्थायी विकास और न्याय आधारित वैश्विक व्यवस्था की ओर प्रेरित करता है।
जलवायु न्याय, सार्वभौमिक स्वास्थ्य, शांति और डिजिटल समानता पर बल।
24. ग्लोबल प्लास्टिक एक्शन पार्टनरशिप (GPAP) – प्लास्टिक प्रदूषण के विरुद्ध वैश्विक पहल
परिचय:
शुरूआत: 2018 में विश्व आर्थिक मंच (WEF) द्वारा।
उद्देश्य: प्लास्टिक कचरे को कम करना, सर्कुलर इकोनॉमी को बढ़ावा देना।
प्रमुख तथ्य:
25 से अधिक सदस्य – भारत का महाराष्ट्र राज्य भी शामिल।
“Friends of Ocean Action” और Platform for Accelerating the Circular Economy से संबद्ध।
महत्त्व:
सार्वजनिक-निजी भागीदारी से काम करता है।
नीति निर्माताओं, उद्योगों और समाज को एक मंच पर लाता है।
25. LEADS रिपोर्ट 2024 – भारत में लॉजिस्टिक्स प्रदर्शन का मूल्यांकन
परिचय:
LEADS = Logistics Ease Across Different States
यह रिपोर्ट वाणिज्य और उद्योग मंत्रालय द्वारा जारी की जाती है – 2024 का संस्करण इस श्रृंखला का छठा संस्करण है।
मुख्य उद्देश्य:
भारत के राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में लॉजिस्टिक्स की गुणवत्ता का मूल्यांकन।
विश्व बैंक के LPI (Logistics Performance Index) के समान।
लाभ:
राज्यों को अपनी कमजोरियों की पहचान करने और सुधार की दिशा में काम करने का अवसर।
उद्योगों और निवेशकों को बेहतर लॉजिस्टिक्स वाले राज्यों की जानकारी मिलती है।
समग्र लक्ष्य:
मल्टी-मोडल लॉजिस्टिक्स इकोसिस्टम को मजबूत करना।
भारत को लॉजिस्टिक्स लागत में कमी के साथ वैश्विक प्रतिस्पर्धा में आगे लाना।
26. GI टैग – भौगोलिक संकेतक: पहचान, संरक्षण और व्यापार
परिभाषा:
GI टैग (Geographical Indication) किसी उत्पाद की भौगोलिक उत्पत्ति और उससे जुड़ी गुणवत्ता या प्रतिष्ठा को दर्शाने वाला चिन्ह है।
उदाहरण:
दार्जिलिंग चाय, कोल्हापुरी चप्पल, नागा मिर्च, बनारसी सिल्क, असम नींबू, काला चावल (मणिपुर)।
महत्त्व:
स्थानीय उत्पादकों को कानूनी संरक्षण।
निर्यात में बढ़त – जैसे नागा मिर्च का UK और असम नींबू का इटली को निर्यात।
सरकारी पहलें:
"अतुल्य भारत के अमूल्य खजाने" टैगलाइन
ODOP (One District One Product) योजना
ONDC के माध्यम से GI उत्पादों का ई-मार्केटिंग
2030 तक 10,000 GI टैग का लक्ष्य
27. कुम्भ मेला और भारत रणभूमि मिशन
कुम्भ मेला:
UNESCO द्वारा मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत घोषित।
12 वर्षों के चक्र में प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक में होता है।
2025 कुम्भ मेला प्रयागराज में प्रस्तावित है।
भारत रणभूमि मिशन:
संस्कृति मंत्रालय की पहल।
भारत की ऐतिहासिक युद्धभूमियों का डिजिटल डॉक्यूमेंटेशन और स्मारक निर्माण।
उद्देश्य: राष्ट्रीय स्मृति, सैन्य परंपरा और गौरव को सम्मान देना।
28. राष्ट्रीय खेल पुरस्कार 2023:
राजीव गांधी खेल रत्न: दीया चक्रवर्ती (बैडमिंटन)
अर्जुन पुरस्कार: विभिन्न खिलाड़ियों को प्रदर्शन आधारित।
द्रोणाचार्य पुरस्कार: कोचों को उनके योगदान के लिए।
ध्यानचंद आजीवन उपलब्धि पुरस्कार
नोट: पुरस्कारों में विविधता के साथ महिला और पैरा खिलाड़ियों को भी प्रतिनिधित्व मिला।
29. नैतिकता टॉपिक – विदेशी सहायता और नैतिक प्रश्न
प्रश्न: जब कोई देश या NGO किसी दूसरे देश को विदेशी सहायता देता है, तो इससे क्या नैतिक समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं?
प्रमुख नैतिक मुद्दे:
आश्रितता की संस्कृति: जरूरतमंद देश आत्मनिर्भरता खो सकता है।
राजनीतिक प्रभाव: सहायता देने वाला देश नीति निर्धारण में हस्तक्षेप कर सकता है।
गोपनीयता और गरिमा का उल्लंघन।
समाधान:
सहयोगात्मक सहायता (Participatory Aid Model)
स्थानीय संस्कृति और निर्णय प्रक्रिया का सम्मान।
30. विज्ञान के संभावित प्रश्न:
(i) न्यूरोमॉर्फिक डिवाइस:
ऐसी इलेक्ट्रॉनिक चिप जो मस्तिष्क की तरह काम करती है।
भविष्य में सुपरकंप्यूटिंग, रोबोटिक्स और AI में उपयोग।
(ii) टाइटेनियम धातु:
हल्की, मजबूत, और जंग प्रतिरोधक धातु।
रक्षा, अंतरिक्ष और चिकित्सा उपकरणों में उपयोगी।
(iii) फॉस-चेक (Phos-Chek):
फायर रिटार्डेंट पदार्थ – वनों की आग रोकने के लिए।
अमेरिका व भारत में जंगलों की आग के दौरान उपयोग।
(iv) CROPS Experiment (ISRO):
Cowpea बीजों को PSLV-C60 द्वारा अंतरिक्ष में भेजा गया।
अंतरिक्ष में पौधों के जीवन पर जैविक प्रयोग – भारत का पहला।
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