सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

शालू की शायरी

मेरी कहानी में अब भी तेरा किस्सा है.. 
की मेरी कहानी में अब भी तेरा किस्सा है..

दिल टूटा हुआ है पर उसमें भी तेरा हिस्सा है...!

-'Sneha'



जीने की कोई वजह नहीं... जाने क्यों जिये जा रही हूँ..

मैं ये गुनाह क्यों बार बार किये जा रही हूँ..

मौत से कोई वास्ता नहीं है मेरा..

फिर भी ना जाने क्यों.. मै मौत की ख्वाहिश किये जा रही हूँ..!!

**************************

"तू अगर कह दे तो तेरे इंतज़ार में रातें बिताऊंगी,  
करूँगी अपने इश्क़ का इज़हार, तुझे रात भर जगाऊंगी।  
हक़ीक़त में ना सही, पर तुझे ख्वाबों में अपना बनाऊँगी,  
तू किसी और का सही, मैं फिर भी तेरे सपने सजाऊंगी।"

**************************


चलो मर जाते हैं तुम पर।
बतायो सीने में दफ़नायोगे क्या? 

**************************

चलो तेरे इश्क में पड़ जाते हैं,
दिल की गहराइयों में, खो जाते हैं।

**************************

सितारों के बिना चाँद भी कहाँ पुरा लगता है,
तेरे बिना हर पल हर लम्हा अधूरा लगता है।
और ये तो तेरी यादें इतनी प्यारी हैं,
की तू अपना सा लगने लगता है, वरना
लगने लगाने से ख्वाब सच कहाँ लगता है।

**************************

भरोसा उसी पर करना जो निभाने लायक हो.. कु

छ पल का साथ तो जनाजा उठाने वाले भी देते हैं...!!!

**************************

4 कदम की दूरी हमारे बीच अब मिलो के हो चुके है... साथ चलने का वादा था, पर हमारे रास्ते अलग हो चुके हैं..!!

**************************

जिस दिन मैं इन शब्दों के जाल से निकल जाऊंगी,
यकीन मानो मेरा उसे दिन मैं बहुत बदल जाऊंगी ।।

**************************

#इश्क़_शायरी, #प्यार_कविता, #हिंदी_शायरी, #दिल_की_बातें, #रोमांटिक_शेर, #यादें, #सितारे, #चाँदनी, #प्रेम_कहानी, #शायरी_का_सफर
#BirthdayWishesInHindi #ShayariForWife #SaliKiShayari #AnniversaryWishesHindi #HindiShayariForHusband #RomanticShayari #LovePoetry #FamilyWishes #SpecialOccasionShayari #BestWishesInHindi

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

POK पर क्यों रुका भारत का युद्ध? अंदर की असली कहानी जानिए!

युद्ध क्यों रुका? मोदी जी ने पीछे क्यों हटे? जानिए असली वजह! जब भारत ने POK को लेकर पाकिस्तान पर सर्जिकल स्ट्राइक जैसे तीखे हमले किए, तब पूरे देश का मनोबल ऊँचाई पर था। हर नागरिक यही चाहता था—अबकी बार POK हमारा! लेकिन अचानक युद्ध रुक गया... क्यों? अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, जो पहले कह चुके थे कि " भारत-पाक का मामला उनका आंतरिक है ", वह अचानक मध्यस्थ क्यों बने? दरअसल, भारत ने इस बार युद्ध को सिर्फ जवाब देने के लिए नहीं, बल्कि पाक अधिकृत कश्मीर (POK) को वापस लेने के उद्देश्य से शुरू किया था। लेकिन जैसे-जैसे भारत की सेना पाक सीमा में अंदर तक प्रवेश करती गई, पाकिस्तान ने परमाणु हमले की धमकी देना शुरू कर दिया। खुफिया सूत्रों की मानें तो भारत ने पाकिस्तान के परमाणु ठिकानों पर एक सटीक ब्रह्मोस मिसाइल हमला किया, जिससे पाकिस्तान की परमाणु नियंत्रण प्रणाली को भारी नुकसान हुआ। इससे पाकिस्तान बौखला गया और उसने इजिप्ट से बोरोन मंगवाया (जो रेडिएशन रोकने में उपयोगी होता है)। साथ ही उसने अमेरिका से संपर्क कर कहा कि भारत ने अगर एक और अटैक किया, तो हमारे पास परमाणु बटन ...

भारतीय लोकतंत्र: चुनौतियों का सामना और समृद्धि की दिशा

1. भारतीय लोकतंत्र की चुनौतियाँ : आजकल कुछ राज्यों में सत्ता परिवर्तन की घटनाएं दिखाई देती हैं, जो लोकतंत्र की मजबूती को परीक्षण में डालती हैं। यह सवाल उठता है कि क्या हमारे देश में लोकतंत्र असली रूप से मजबूत है या नहीं। कई राज्यों में आवश्यक चरणों के बिना सत्ता परिवर्तन हो रहा है, जिसके परिणामस्वरूप निर्वाचित सरकारें गिर रही हैं। इसमें न केवल पैसे का प्रभाव है, बल्कि राज्यपालों, चुनाव आयोग, और केंद्रीय जांच एजेंसियों की भूमिका भी दिखाई देती है। 2. आजादी के बाद के दशकों की चुनौतियाँ : आजादी के बाद के दशकों में हमने सामाजिक, राजनैतिक, और आर्थिक चुनौतियों का सामना किया है। लोकतंत्र में कई मुद्दों की उभरती चिंताएं हैं, जैसे कि नेतृत्व की महत्वपूर्णता और राजनीतिक प्रणाली की मजबूती के बिना, देश में विकास संभव नहीं है। विभाजनकारी कानूनों की प्रतिष्ठा कम होने से आम लोगों की आवश्यकताएं अधिकाधिक बढ़ रही हैं। 3. लोकतंत्र और समाज: लोकतंत्र और समाज के बीच गहरा संबंध होता है। लोकतंत्र उन संस्थाओं के बिना असंभव है जो सामाजिक जागरूकता बढ़ाने और लोगों की आवाज को सुनने में मदद करते हैं। सहायता करने वाल...

"वीर स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त: एक अनसुनी कहानी"

1947 में आजादी के पश्चात, बटुकेश्वर को रिहाई मिली। लेकिन उन्हें वह दर्जा नहीं मिला जो उनके योगदान के अनुरूप था। आजाद भारत में उन्हें नौकरी के लिए दर-दर भटकना पड़ा। कभी सब्जी बेचते, कभी टूरिस्ट गाइड बनकर, वो नहीं थमते थे। पटना में एक दिन, परमिट के लिए जब उनका आवेदन कमिश्नर के सामने पहुँचा, तो वह सिर्फ इसलिए बताया कि उनके पास स्वतंत्रता सेनानी का प्रमाणपत्र नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपने परिवारवालों से कहा, "कभी सोचा नहीं था कि वो दिल्ली, जहाँ मैंने बम फेंका था, वहीं मेरी मौत होगी, पर स्ट्रेचर पर पड़ा हुआ।" कुछ समय बाद, जब राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को इसका पता लगा तो उन्होंने माफी मांगी थी। 1963 में उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया गया, लेकिन उसके बाद उनकी चुप्प बरकरार रही। 1964 में जीवन के अंतिम दिनों में, बटुकेश्वर दिल्ली के सरकारी अस्पताल में कैंसर के खिलवाड़ से जूझ रहे थे। उन्होंने अपने परिवारवालों से कहा, "मेरी इच्छा है कि मेरा अंतिम संस्कार भगत सिंह की समाधि के पास हो।" 17 जुलाई को उन्हें कोमा में डाल दिया गया और 20 जुलाई 1965 की रात उनका देहांत हो ...