February 2025 Current Affairs | सभी परीक्षाओं के लिए One-Stop तैयारी | Shanti Classes
1. मुफ्त सुविधाएं (Freebies) – विस्तारपूर्वक व्याख्या
समाचार में क्यों?
हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने यह विचार किया कि क्या सरकार द्वारा दी जा रही मुफ्त सुविधाएं (जैसे मुफ्त बिजली, लैपटॉप, साइकिल, पानी आदि) गरीबों में "आलस्य" या "परजीवी मानसिकता" को बढ़ावा दे रही हैं? क्या इससे लोग काम करने की इच्छा खो रहे हैं?
मुफ्त सुविधाएं क्या होती हैं?
इनकी कोई सटीक परिभाषा नहीं है, लेकिन आमतौर पर ये ऐसी सुविधाएं होती हैं जिन्हें सरकार बिना किसी शुल्क के जनता को देती है।
उदाहरण: चुनाव के समय मुफ्त में लैपटॉप या स्कूटी देने का वादा।
RBI के अनुसार:
"ये ऐसी लोक-कल्याणकारी सेवाएं होती हैं जिनके लिए नागरिकों को कोई भुगतान नहीं करना होता।"
मुफ्त सुविधा और लोक कल्याण में अंतर
विषय | लोक कल्याण (Welfare) | मुफ्त सुविधाएं (Freebies) |
उद्देश्य | मानव विकास | अल्पकालिक लाभ |
असर | स्थायी मानवीय विकास | काम की इच्छा में कमी |
उदाहरण | MGNREGA, PDS | मुफ्त पानी, बिजली, टीवी |
मुफ्त सुविधाओं के फायदे और नुकसान
सकारात्मक प्रभाव:
गरीबों की बुनियादी जरूरतें पूरी होती हैं।
स्कूलों में नामांकन दर बढ़ती है (जैसे मिड डे मील, साइकिल योजना)।
समाज में समानता आती है।
वंचित तबकों की भागीदारी बढ़ती है।
नकारात्मक प्रभाव:
सरकार पर आर्थिक बोझ बढ़ता है।
संसाधनों का दुरुपयोग होता है।
लोग मेहनत से कतराने लगते हैं।
भविष्य की पीढ़ियों पर असर पड़ सकता है।
इस समस्या के समाधान के लिए सुझाव
नीतिगत सुधार: ऐसी योजनाएं बनाएं जो एक तय अवधि बाद स्वतः समाप्त हो जाएं।
भ्रष्टाचार पर रोक: पारदर्शिता सुनिश्चित करें।
बीमा कवरेज बढ़ाएं: आर्थिक सुरक्षा बने रहे।
राजनीतिक समझौता: केंद्र और राज्य मिलकर काम करें।
मतदाता जागरूकता: जनता को मुफ्त की कीमत समझाई जाए।
दुनिया से सीखें: जैसे श्रीलंका में फ्री सुविधाओं से आर्थिक संकट आया।
निष्कर्ष
प्रसिद्ध अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन के "Capability Approach" के अनुसार, सरकार को ऐसे उपायों को बढ़ावा देना चाहिए जो लोगों की योग्यता और आत्मनिर्भरता को विकसित करें। केवल मुफ्त सुविधाएं देना दीर्घकालिक समाधान नहीं हैं।
राज्यों में पंचायतों को शक्तियों का हस्तांतरण – सम्पूर्ण व्याख्या
समाचार में क्यों?
हाल ही में पंचायती राज मंत्रालय ने एक रिपोर्ट जारी की है:
"राज्यों में पंचायतों को अंतरण की स्थिति – साक्ष्य आधारित रैंकिंग"
इसमें भारत के विभिन्न राज्यों में पंचायतों को मिली शक्तियों और अधिकारों का तुलनात्मक विश्लेषण किया गया है।
पंचायतों को 'अंतरण' का क्या मतलब है?
अंतरण का अर्थ है:
ऊपरी स्तर की सरकार (राज्य या केंद्र) जब अपने अधिकार, शक्तियाँ, कर्तव्य, संसाधन और बजट पंचायतों को सौंप देती है, ताकि पंचायतें अपने गांव के विकास और प्रशासन में स्वतंत्र निर्णय ले सकें – तो इसे ही पंचायतों को "अंतरण" कहा जाता है।
लक्ष्य:
स्थानीय समस्याओं का स्थानीय स्तर पर समाधान
लोकतंत्र को जमीनी स्तर पर मजबूत करना
रिपोर्ट की मुख्य बातें:
शीर्ष 3 राज्य:
कर्नाटक
केरल
तमिलनाडु
सबसे कमजोर प्रदर्शन:
दादरा-नागर हवेली, पुडुचेरी और लद्दाख
2021–22 में औसत अंतरण:
पूरे देश में पंचायतों को औसतन 43.9% शक्तियाँ ही दी गईं थीं।
पंचायतों के समक्ष मुख्य चुनौतियाँ:
चुनाव संबंधी समस्याएँ:
समय पर पंचायत चुनाव नहीं होते, जिससे संविधान के अनुच्छेद 243E का उल्लंघन होता है।
सीमित कार्यक्षेत्र:
पंचायतों के कार्य केवल साफ-सफाई, जलापूर्ति जैसे सीमित क्षेत्रों में हैं।
बाकी काम अब भी सरकारी एजेंसियों (Parastatal Bodies) द्वारा किए जाते हैं।
वित्तीय निर्भरता:
पंचायतें 95% पैसा केंद्र और राज्य सरकार से मिलने वाले अनुदानों पर निर्भर करती हैं।
खुद के राजस्व संसाधन कम हैं।
मानव संसाधन की कमी:
पंचायत सचिवों, तकनीकी सहायकों और प्रशासनिक कर्मचारियों की भारी कमी है।
कई राज्यों में 1 सचिव 17 पंचायतों को संभालता है।
डिजिटल अवसंरचना की कमी:
देश की 40,000 पंचायतों के पास कंप्यूटर तक नहीं हैं।
केवल 7 राज्यों में ही 100% पंचायत भवन हैं।
जवाबदेही की कमी:
पारदर्शिता और जनभागीदारी की कमी के कारण धन के दुरुपयोग के मामले सामने आते हैं।
समाधान और सुझाव:
राज्य निर्वाचन आयोग को मजबूत करें
चुनावों की समयबद्धता सुनिश्चित हो।
साझा मतदाता सूची बनाई जाए।
पंचायतों की स्थिरता बढ़ाएं
आरक्षित सीटों पर समान प्रतिनिधियों को दो–तीन कार्यकाल तक मौका मिले।
वित्तीय सुधार हो
हर 5 वर्ष में राज्य वित्त आयोग का गठन अनिवार्य हो।
पंचायतों को स्वराजस्व अर्जन के साधन दिए जाएं।
पारदर्शिता और ऑडिट प्रणाली लागू हो
PFMS जैसे पोर्टल से अनुदान और खर्च को ट्रैक किया जाए।
स्थानीय भर्ती आयोग बने
पंचायत सचिव और अन्य कर्मियों की नियुक्ति के लिए एक स्वतंत्र आयोग हो।
प्रशिक्षण और पाठ्यक्रम विकसित किया जाए
पंचायत प्रतिनिधियों को MBA जैसे लोक प्रशासन पाठ्यक्रम में प्रशिक्षण मिले।
निष्कर्ष:
पंचायतें केवल चुनावी शोपीस न बनें। अगर उन्हें वाकई में “ग्राम स्वराज” का वाहक बनाना है, तो उनके पास अधिकार, बजट और जवाबदेही तीनों हों।
पंचायती राज संस्थाओं में प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व – संपूर्ण व्याख्या
समाचार में क्यों?
हाल ही में पंचायती राज मंत्रालय द्वारा गठित एक समिति ने "पंचायती संस्थाओं में महिलाओं की प्रॉक्सी भागीदारी को समाप्त करने" के सुझाव दिए हैं।
इसका उद्देश्य पंचायतों में चुनी गई महिलाओं की वास्तविक भागीदारी और नेतृत्व को सुनिश्चित करना है।
क्या होता है प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व?
जब किसी पंचायत चुनाव में महिला उम्मीदवार निर्वाचित होती हैं, लेकिन वास्तविक कार्य और निर्णय उनके पति या परिवार के पुरुष सदस्य करते हैं,
तो इसे "प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व" कहते हैं।
सरपंच पति या "सरपंच पति राज" जैसी शब्दावलियाँ इसी पर आधारित हैं।
महिलाओं के लिए आरक्षण – एक प्रगतिशील कदम
73वां संविधान संशोधन (1992) के तहत पंचायतों में महिलाओं के लिए 1/3 (33%) आरक्षण अनिवार्य किया गया।
21 राज्यों ने इसे बढ़ाकर 50% कर दिया है।
बिहार देश का पहला राज्य था, जिसने पंचायतों में महिलाओं को 50% आरक्षण दिया।
आज की स्थिति:
पूरे देश में पंचायतों में चुने गए प्रतिनिधियों में 46.6% महिलाएं हैं।
परंतु, कई जगह इनकी जगह पति या परिवार के पुरुष सदस्य निर्णय लेते हैं, जो संविधान की भावना के विपरीत है।
प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व के खतरे
महिलाओं के नेतृत्व पर संदेह उत्पन्न होता है।
आरक्षण का उद्देश्य विफल हो जाता है।
महिलाओं की सक्षमता और आत्मनिर्भरता बाधित होती है।
यह लैंगिक समानता और लोकतंत्र की मूल भावना के खिलाफ है।
समिति के सुझाव – कैसे खत्म करें प्रॉक्सी राज
कड़ा दंड:
यदि कोई पुरुष प्रतिनिधि निर्वाचित महिला के काम में हस्तक्षेप करता है, तो उस पर दंडात्मक कार्रवाई होनी चाहिए।
सजा की व्यवस्था तय की जा रही है।
मजबूत नीतियाँ:
केरल जैसे राज्यों की तरह
जेंडर-विशिष्ट रजिस्ट्रेशन
सार्वजनिक शपथग्रहण समारोह
महिला पंचायत संगठन (Sangh) को अपनाने का सुझाव।
तकनीकी उपाय:
महिलाओं को स्थानीय भाषा में डिजिटल ट्रेनिंग मिले।
AI आधारित प्रशिक्षण (FAQ बॉट्स) की मदद से कानूनों की जानकारी दी जाए।
जवाबदेही और पारदर्शिता:
पंचायतों के निर्णय और बैठकें ऑनलाइन ट्रैक हों।
“पंचायत निर्णय पोर्टल” के ज़रिए नागरिक जान सकें कि कौन प्रतिनिधि सक्रिय है।
जन जागरूकता:
प्रॉक्सी की सूचना देने वाले को पुरस्कार मिल सकता है।
हेल्पलाइन और निगरानी समितियाँ बनाई जाएं।
निष्कर्ष:
महिलाओं को केवल नाम मात्र का प्रतिनिधि बनाना लोकतंत्र का मज़ाक है।
यदि महिलाएं पंचायतों में स्वतंत्र और सशक्त भूमिका निभाएं, तभी आरक्षण का उद्देश्य सफल होगा और "नारी शक्ति" का सही अर्थ समाज में दिखेगा।
1.3.1 सरकार ‘Deregulation Commission’ का गठन करेगी
(Deregulation = गैर-नियमन / अनियमन)
समाचार में क्यों?
प्रधानमंत्री ने घोषणा की है कि केंद्र सरकार “Deregulation Commission (गैर-नियमन आयोग)” का गठन करेगी। इसका उद्देश्य है:
सरकारी दखल को कम करना
बेवजह के नियमों को हटाना
व्यापार और नागरिकों के लिए प्रक्रियाएं आसान बनाना
इसे जन विकास विधेयक 2.0 (Jan Vishwas Bill 2.0) के तहत घोषित किया गया।
Deregulation का मतलब क्या होता है?
सरल भाषा में: जब सरकार किसी क्षेत्र या उद्योग पर लगी कठिन या पुराने नियमों को हटाती है, ताकि वहां आसान और तेज़ कामकाज हो सके, तो उसे Deregulation कहते हैं।
उदाहरण:
नए स्टार्टअप से 10 विभागों की अनुमति की बजाय 2 की ही जरूरत हो
छोटे व्यापारियों को हर साल लाइसेंस न रिन्यू कराना पड़े
पुराने कानूनों को अपराध की श्रेणी से हटाया जाए
जन विकास विधेयक 2.0 क्या है?
यह सरकार की Ease of Doing Business नीति का हिस्सा है
इस विधेयक का लक्ष्य है कि 100 से अधिक पुराने कानूनों को
सरल किया जाए
अपराध की श्रेणी से हटाया जाए
नागरिकों और MSMEs पर बोझ कम किया जाए
दुनिया के अन्य देशों में ऐसे प्रयास:
देश | पहल का नाम |
अमेरिका | Department of Government Efficiency (DoGE) |
UK | Better Regulation Framework |
न्यूज़ीलैंड | Ministry of Regulation |
भारत में Deregulation की ज़रूरत क्यों है?
1. आर्थिक विकास के लिए आवश्यक
भारत को 8% विकास दर चाहिए
इसके लिए निवेश दर 31% से 35% तक बढ़ानी होगी
इसके लिए प्रक्रियाएं आसान बनानी होंगी
2. MSMEs (छोटे व्यवसायों) को लाभ
छोटे व्यवसाय जटिल नियमों से परेशान होते हैं
सरल नियमों से उनकी लागत घटती है, कामकाज तेज़ होता है
3. महिला सशक्तिकरण
कुछ राज्यों (जैसे आंध्रप्रदेश, कर्नाटक, हरियाणा) ने नाइट शिफ्ट में महिलाओं को अनुमति दी
इससे रोजगार के अवसर बढ़े
4. राज्यों में प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी
जैसे हरियाणा व तमिलनाडु ने भवन निर्माण के नियम सरल किए
अन्य राज्य भी उनसे प्रेरणा लेकर सुधार कर सकते हैं
निष्कर्ष:
“Minimum Government, Maximum Governance” की भावना को साकार करने के लिए Deregulation Commission एक निर्णायक कदम हो सकता है।
यदि यह आयोग पारदर्शिता, सरलता और जवाबदेही के साथ काम करता है, तो भारत में व्यापार करना, योजनाओं का लाभ उठाना और सरकारी प्रक्रियाएं — तीनों ही आसान हो जाएंगे।
1.3.2 मणिपुर में राष्ट्रपति शासन (President’s Rule in Manipur)
समाचार में क्यों?
भारत के राष्ट्रपति ने मणिपुर राज्य में राष्ट्रपति शासन लागू करने की घोषणा की है।
यह राज्य में कानून व्यवस्था की बिगड़ती स्थिति और सरकार की विफलता के चलते किया गया।
इससे पहले मणिपुर में 10 बार राष्ट्रपति शासन लग चुका है। यह 11वीं बार हुआ है।
पिछली बार मणिपुर में राष्ट्रपति शासन 2001–2002 में लगा था।
राष्ट्रपति शासन क्या होता है? (What is President’s Rule?)
भारतीय संविधान का अनुच्छेद 356 कहता है कि:
यदि किसी राज्य की सरकार संविधान के अनुसार नहीं चल रही हो,
तो वहाँ राष्ट्रपति शासन लगाया जा सकता है।
इसमें राज्य की विधानसभा निलंबित या भंग कर दी जाती है,
और प्रशासन राष्ट्रपति के अधीन चला जाता है।
राष्ट्रपति शासन लागू करने की प्रक्रिया:
चरण | विवरण |
1. राज्यपाल की रिपोर्ट | राज्यपाल राष्ट्रपति को सूचित करता है कि राज्य की सरकार असंवैधानिक ढंग से चल रही है |
2. राष्ट्रपति की घोषणा | राष्ट्रपति अनुच्छेद 356 के तहत अधिसूचना जारी करता है |
3. संसद की मंजूरी | संसद के दोनों सदनों (लोकसभा व राज्यसभा) से 2 महीने के भीतर अनुमोदन जरूरी होता है |
4. अवधि | पहली मंजूरी के बाद राष्ट्रपति शासन 6 माह तक लागू रह सकता है |
5. अधिकतम अवधि | संसद की मंजूरी के साथ इसे 3 साल तक बढ़ाया जा सकता है |
राष्ट्रपति शासन के प्रभाव:
राज्य की विधानसभा निलंबित हो जाती है
राज्यपाल की सारी शक्तियाँ राष्ट्रपति के अधीन आ जाती हैं
राज्य के सभी निर्णय अब केंद्र सरकार के आदेश से लिए जाते हैं
राज्य के हाई कोर्ट के कामकाज पर कोई असर नहीं होता
महत्वपूर्ण बिंदु:
अनुच्छेद 356 का अत्यधिक प्रयोग एक राजनीतिक दुरुपयोग माना गया है।
सरकारों को गिराने के लिए अतीत में इसका कई बार दुरुपयोग हुआ।
एस.आर. बॉम्बे केस (1994) में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि:
अनुच्छेद 356 का अंतिम उपाय (Last Resort) के रूप में ही प्रयोग होना चाहिए।
निष्कर्ष:
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन एक गंभीर प्रशासनिक संकट का संकेत है।
इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य सरकार शांति, सुरक्षा और संविधान के मूल सिद्धांतों को लागू करने में विफल रही है।
अब केंद्र सरकार पर जिम्मेदारी है कि वह मणिपुर में लोकतंत्र और शांति की बहाली सुनिश्चित करे।
1. राजव्यवस्था एवं शासन (Polity and Governance)
1.1 मुफ्त सुविधाएं और चुनावी लोकलुभावनवाद
फरवरी 2025 में सुप्रीम कोर्ट ने चुनावी घोषणापत्रों में मुफ्त सुविधाओं के वादों को लेकर राज्यों और निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा। यह मसला संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और राजकोषीय अनुशासन से जुड़ा हुआ है। इस पर बहस हो रही है कि क्या मुफ्त सुविधाएं सामाजिक न्याय का हिस्सा हैं या मतदाताओं को लुभाने की युक्ति।
UPSC दृष्टिकोण: इससे जुड़े प्रश्न संविधान के मूल सिद्धांत, न्यायिक सक्रियता और लोक वित्त पर बन सकते हैं।
1.2 पंचायती राज संस्थाओं में प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व और शक्तियों का हस्तांतरण
कई राज्यों में महिला आरक्षण के बाद भी असली सत्ता उनके पतियों/परिवारजनों द्वारा संभाली जाती है जिसे “प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व” कहा जाता है। फरवरी 2025 में इस पर राष्ट्रीय महिला आयोग ने राज्यों को कड़ा परामर्श जारी किया। इसके अलावा कई राज्यों में पंचायतों को 29 विषयों में अपेक्षित शक्तियां आज भी नहीं दी गई हैं।
UPSC दृष्टिकोण: 73वें संविधान संशोधन, विकेंद्रीकरण, और सुशासन से जुड़े प्रश्न संभावित हैं।
1.3 संबंधित सुर्ख़ियां
सरकार विनियमन आयोग की घोषणा: यह आयोग सरकारी विभागों के अत्यधिक नियंत्रण व अनुपयोगी नियमों की समीक्षा करेगा।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन: बढ़ती हिंसा व अस्थिरता के चलते अनुच्छेद 356 के तहत राष्ट्रपति शासन लगाया गया।
2. अंतर्राष्ट्रीय संबंध (International Relations)
2.1 भारत-कतर रणनीतिक साझेदारी
भारत और कतर ने फरवरी 2025 में ऊर्जा, रक्षा, और आपराधिक प्रत्यार्पण समझौते पर हस्ताक्षर किए। इससे भारत की वेस्ट एशिया नीति को मजबूती मिली है।
2.2 भारत-अमेरिका असैन्य परमाणु समझौता
समझौते की 15वीं वर्षगांठ के अवसर पर दोनों देशों ने ‘न्यूक्लियर हाईब्रिड रिएक्टर कोर टेक्नोलॉजी’ पर संयुक्त शोध प्रारंभ किया।
2.3 BIMSTEC सम्मेलन 2025
ढाका में आयोजित इस सम्मेलन में भारत ने ‘ब्लू इकोनॉमी रोडमैप’ और ‘बंदरगाह कनेक्टिविटी परियोजना’ प्रस्तावित की।
3. अर्थव्यवस्था (Economy)
3.1 राष्ट्रीय क्रिटिकल मिनरल मिशन
सरकार ने दुर्लभ धातुओं जैसे लिथियम, कोबाल्ट, और निकेल की खोज व उत्पादन को बढ़ावा देने हेतु यह मिशन लॉन्च किया। फरवरी 2025 में भारत-ऑस्ट्रेलिया क्रिटिकल मिनरल साझेदारी पर समझौता भी हुआ।
3.2 प्रधानमंत्री धन-धान्य कृषि योजना
यह योजना किसानों को मंडी से सीधे डिजिटल भुगतान, फसल विविधिकरण और जैविक खेती को प्रोत्साहित करती है। फरवरी 2025 में इसे 150 और जिलों में विस्तारित किया गया।
3.3 जीआई टैग और नई HS कोड प्रणाली
छत्तीसगढ़ के ‘बासमती प्रकार चावल’ को GI टैग मिला और इसके निर्यात के लिए नया Harmonized System Code जारी हुआ।
4. सुरक्षा (Security)
4.1 NASM-SR का परीक्षण
भारतीय नौसेना ने NASM-SR (नेवल एंटी-शिप मिसाइल-शॉर्ट रेंज) का सफल परीक्षण फरवरी में किया। यह स्वदेशी मिसाइल 55 किमी की रेंज तक जहाजों को निशाना बना सकती है।
4.2 साइबर सुरक्षा और एल्गोरिदम एम्पलीफिकेशन
केंद्र सरकार ने AI आधारित “रियल टाइम सोशल मीडिया मॉनिटरिंग सेल” स्थापित किया है जो कट्टरपंथी सामग्री की पहचान करेगा।
5. पर्यावरण (Environment)
5.1 सौर ऊर्जा में प्रगति
भारत ने फरवरी 2025 में अपनी कुल स्थापित सौर ऊर्जा क्षमता को 80 गीगावॉट तक पहुंचा दिया। ‘सौर नवीकरणीय ऊर्जा गाथा’ नामक नया पोर्टल लॉन्च हुआ जो निजी निवेशकों और MSMEs के बीच साझेदारी को बढ़ावा देगा।
5.2 मृदा स्वास्थ्य कार्ड योजना
सरकार ने मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं की संख्या 400 से बढ़ाकर 700 कर दी है और डिजिटल कार्ड की अनिवार्यता लागू की है।
निष्कर्ष:
फरवरी 2025 के करेंट अफेयर्स में शासन, वैश्विक भू-राजनीति, आर्थिकी, सैन्य शक्ति और हरित विकास के क्षेत्रों में महत्त्वपूर्ण घटनाएँ देखने को मिलीं। UPSC जैसे परीक्षा में इनसे संबंधित तथ्यात्मक और विश्लेषणात्मक दोनों तरह के प्रश्न पूछे जा सकते हैं।
1. राजव्यवस्था एवं शासन (Polity and Governance1.1. मुफ्त सुविधाएं (Freebies)
राजनीतिक संदर्भ: दिल्ली विधानसभा चुनाव 2025 में राजनीतिक दलों द्वारा मुफ्त सुविधाओं (जैसे मुफ्त बिजली, पानी, परिवहन) का वादा किया गया, जिसे "रेवड़ी संस्कृति" कहा गया।
विवाद: कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि ये मुफ्त सुविधाएं आर्थिक विकास में बाधा बन सकती हैं, जबकि अन्य इसे सामाजिक-आर्थिक समानता के लिए आवश्यक मानते हैं।
1.2. राज्यों में पंचायतों को अंतरण या हस्तांतरण की व्यवस्था
प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व: कुछ राज्यों में पंचायतों में प्रॉक्सी प्रतिनिधित्व की समस्या सामने आई, जहां निर्वाचित प्रतिनिधियों के स्थान पर अन्य व्यक्ति कार्य कर रहे हैं, जिससे लोकतांत्रिक प्रक्रिया प्रभावित हो रही है।
1.3. संयुक्त सुर्ख़ियां
सरकार विनियमन आयोग का गठन: सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों में नियमन की प्रक्रिया की समीक्षा के लिए एक नया आयोग गठित करने की घोषणा की।
मणिपुर में राष्ट्रपति शासन: मणिपुर में कानून-व्यवस्था की स्थिति बिगड़ने के कारण फरवरी 2025 में राष्ट्रपति शासन लागू किया गया।
2. अंतर्राष्ट्रीय संबंध (International Relations)
2.1. भारत-अफगानिस्तान संबंध
तालिबान के साथ संवाद: भारत के विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अफगानिस्तान के कार्यवाहक विदेश मंत्री आमिर खान मुत्ताकी से बातचीत की, जो भारत और तालिबान के बीच संबंधों में एक नया कदम माना जा रहा है।
2.2. भारत-पाकिस्तान तनाव
सैन्य संघर्ष: कश्मीर में आतंकवादी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच सैन्य तनाव बढ़ा, जिसमें दोनों देशों ने एक-दूसरे के क्षेत्रों में मिसाइल हमले किए।
अंतर्राष्ट्रीय प्रतिक्रिया: संयुक्त राज्य अमेरिका ने दोनों देशों के बीच संघर्ष को रोकने में मध्यस्थता की भूमिका निभाई।
2.3. भारत-तुर्की और अज़रबैजान संबंध
राजनयिक तनाव: तुर्की और अज़रबैजान ने पाकिस्तान के समर्थन में बयान दिए, जिससे भारत के इन देशों के साथ व्यापारिक और राजनयिक संबंधों में तनाव उत्पन्न हुआ।
3. अर्थव्यवस्था (Economy)
3.1. MSMEs के लिए म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी योजना
योजना का शुभारंभ: केंद्र सरकार ने MSMEs के लिए म्यूचुअल क्रेडिट गारंटी योजना शुरू की, जिसके तहत बिना संपार्श्विक के ₹100 करोड़ तक के ऋण की सुविधा प्रदान की जाएगी।
3.2. भारत की आर्थिक वृद्धि दर
संयुक्त राष्ट्र की रिपोर्ट: संयुक्त राष्ट्र ने भारत की 2025 की आर्थिक वृद्धि दर का अनुमान 6.6% से घटाकर 6.3% कर दिया, जिसका कारण वैश्विक व्यापार तनाव और नीति अनिश्चितता बताया गया।
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4. सुरक्षा (Security)
4.1. NASM-SR मिसाइल का परीक्षण
सफल परीक्षण: भारतीय नौसेना और DRDO ने NASM-SR (Naval Anti-Ship Missile - Short Range) का सफल परीक्षण किया, जो समुद्री लक्ष्यों पर सटीक प्रहार करने में सक्षम है।
4.2. सैन्य अभ्यास
'सागर कवच' अभ्यास: भारतीय तटरक्षक बल ने पश्चिम बंगाल में 'सागर कवच' अभ्यास आयोजित किया, जिसका उद्देश्य तटीय सुरक्षा को मजबूत करना था।
5. पर्यावरण (Environment)
5.1. पराली जलाना
घटती घटनाएं: लुधियाना में रबी सीजन 2025 के दौरान पराली जलाने की घटनाओं में 13.9% की कमी दर्ज की गई, जो 2022 की तुलना में एक सकारात्मक संकेत है।
5.2. नए रामसर स्थल
चार नए स्थल: भारत ने चार नए स्थलों को रामसर साइट्स के रूप में नामित किया, जिससे देश में कुल रामसर साइट्स की संख्या 89 हो गई।
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6. सामाजिक मुद्दे (Social Issues)
6.1. ऑनलाइन बाल शोषण
बढ़ती चिंता: ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों के खिलाफ अपराधों में वृद्धि हुई है, जिससे डिजिटल सुरक्षा उपायों की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
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7. विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी (Science and Technology)
7.1. ISRO का 100वां प्रक्षेपण
GSLV-F15 मिशन: ISRO ने अपने 100वें प्रक्षेपण में GSLV-F15 रॉकेट के माध्यम से NVS-02 नेविगेशन सैटेलाइट को सफलतापूर्वक कक्षा में स्थापित किया, जो NavIC प्रणाली का हिस्सा है।
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8. संस्कृति (Culture)
8.1. पद्म पुरस्कार 2025
सम्मानित व्यक्तित्व: 2025 में 139 व्यक्तियों को पद्म पुरस्कारों से सम्मानित किया गया, जिसमें 7 पद्म विभूषण, 19 पद्म भूषण और 113 पद्म श्री शामिल हैं।
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9. नैतिकता (Ethics)
9.1. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर अश्लीलता
कानूनी प्रावधान: 'भारतीय न्याय संहिता, 2023' की धारा 294 के तहत अश्लील सामग्री के निर्माण, वितरण या प्रदर्शन को अपराध माना गया है।
9.2. निगरानी पूंजीवाद (Surveillance Capitalism)
डेटा गोपनीयता: तकनीकी कंपनियों द्वारा व्यक्तिगत डेटा के संग्रह और उपयोग पर चिंता व्यक्त की गई है, जिससे उपयोगकर्ताओं की गोपनीयता पर प्रभाव पड़ रहा है।
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10. योजनाएं (Schemes in News)
10.1. प्रधान मंत्री अन्नदाता आय संरक्षा अभियान (PM-AASHA)
योजना का विस्तार: सरकार ने PM-AASHA योजना को 2025-26 तक बढ़ा दिया है, जिसका उद्देश्य किसानों को उनकी उपज के लिए उचित मूल्य सुनिश्चित करना है।
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