सीधे मुख्य सामग्री पर जाएं

क्या है कृष्ण होने के मायने?

1. जब व्यक्ति पहली बार गाली सुनकर भी उसके सर काटने की शक्ति रखता है, और 99 और गालियों के बावजूद भी सामर्थ्य रखता है, तो वह कृष्ण होता है।

2. जब व्यक्ति सुदर्शन जैसे शस्त्रों के मालिक होने के बावजूद हमेशा हाथ में मुरली धारण करता है, तो वह कृष्ण होता है।

3. जब द्वारिका के विभूषणों के बावजूद व्यक्ति सुदामा को मित्र बनाए रखता है, तो वह कृष्ण होता है।

4. जब मृत्यु के समय पर भी व्यक्ति नृत्य करता है, तो वह कृष्ण होता है।

5. जब कोई सर्वसामर्थ्य के बावजूद अपने जीवन को सारथी के रूप में गुजारता है, तो वह कृष्ण होता है।

6. भक्ति के प्रति अनुरागी होने के बाद भी यदि लीलाओं में रसिकता है, तो वो कृष्ण हैं।

7. समस्त विश्व को ब्रजभूमि में पाने के बाद भी यदि गोपियों का दिल जीतते हैं, तो वो कृष्ण हैं।

8. अध्यात्मिक ज्ञान के धनी होने के बाद भी यदि सभी को अपने उपदेशों से प्रेरित करते हैं, तो वो कृष्ण हैं।

9. सभी दुखों के बावजूद यदि हंसते हुए जीते हैं, तो वो कृष्ण हैं।

10. सम्पूर्ण जीवों के प्रति स्नेह होने के बाद भी यदि स्वयं को छिपाने की क्षमता रखते हैं, तो वो कृष्ण हैं।

11. सभी चुनौतियों का सामना करने के बाद भी यदि आत्मा को आत्मनिर्भर बनाते हैं, तो वो कृष्ण हैं।

12. सभी लोगों को अपने प्रेम और सहानुभूति से जीवन में आग्रहित करने के बावजूद यदि आत्मा कभी भी आत्मविश्वास की हानि नहीं करती, तो वो कृष्ण हैं।

13. सभी कार्यों में उच्च स्तर पर निष्क्रियता और समर्पण दिखाने के बाद भी यदि आत्मा अपने धर्म के प्रति सदैव समर्थ रहती है, तो वो कृष्ण हैं।

14. सभी मानव जीवन के अनुभवों से सीख कर यदि आत्मा सदैव आगे बढ़ती है, तो वो कृष्ण हैं।

15. सभी समय के साथ यदि आत्मा का सार्वभौमिक संवाद सत्य के पथ पर चलता है, तो वो कृष्ण हैं।

16. भक्ति के प्रति अग्रणी होने के बाद भी, यदि व्यक्ति लीलाओं के माध्यम से भगवान के साथ आत्मा को बहुत सारा आनंद लेता है, तो वह कृष्ण होता है।

17. सम्पूर्ण विश्व का स्वामी बनने के बाद भी, यदि व्यक्ति गोपियों के दिल को जीतता है, तो वह कृष्ण होता है।

18. आध्यात्मिक ज्ञान के धनी होने के बाद भी, यदि व्यक्ति सभी को अपने आदर्शों से प्रेरित करता है, तो वह कृष्ण होता है।

19. सभी कठिनाइयों का सामना करने के बाद भी, यदि व्यक्ति आनंदपूर्वक जीतता है, तो वह कृष्ण होता है।

20. सम्पूर्ण जीवों के प्रति स्नेह होने के बाद भी, यदि व्यक्ति स्वयं को मोह से बचाता है, तो वह कृष्ण होता है।

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

मटन खाने से होने वाली सामान्य परेशानियाँ

मेडिकल-आधारित और व्यावहारिक उत्तर — बिना भ्रम के। 1) मटन खाने से होने वाली सामान्य परेशानियाँ पचने में भारी गैस, एसिडिटी, अपच वजन बढ़ना कोलेस्ट्रॉल बढ़ना यूरिक एसिड बढ़ना फैटी लिवर का खतरा ब्लड प्रेशर बढ़ सकता है 2) मटन खाने के मुख्य नुकसान Saturated Fat ज्यादा → हार्ट पर बोझ ज्यादा मसालेदार मटन → पेट और आंत खराब बार-बार सेवन → मोटापा गंदा/अधपका मटन → इंफेक्शन, कीड़े 3) स्टोन वाले या Gall Bladder Operation वाले को मटन क्यों नहीं खाना चाहिए मटन में फैट ज्यादा होता है फैट पचाने के लिए पित्त (bile) ज्यादा चाहिए Gall bladder न होने पर bile सही मात्रा में रिलीज नहीं होता नतीजा → दर्द, दस्त, उलटी, गैस 👉 इसलिए मटन Avoid या बहुत कम लेना चाहिए। 4) Pregnancy में मटन खाने का नुकसान ज्यादा फैट → एसिडिटी, उलटी ज्यादा मसाले → गर्भाशय में जलन अधपका मटन → बैक्टीरिया/टॉक्सोप्लाज़्मा का खतरा ज्यादा मात्रा → BP और शुगर बिगड़ सकता है 👉 Pregnancy में मटन सुरक्षित नहीं माना जाता । 5) जो महिला बच्चा पैदा करना चाहती है (Planning Phase) ❌ मटन खाने से Fert...

"वीर स्वतंत्रता सेनानी बटुकेश्वर दत्त: एक अनसुनी कहानी"

1947 में आजादी के पश्चात, बटुकेश्वर को रिहाई मिली। लेकिन उन्हें वह दर्जा नहीं मिला जो उनके योगदान के अनुरूप था। आजाद भारत में उन्हें नौकरी के लिए दर-दर भटकना पड़ा। कभी सब्जी बेचते, कभी टूरिस्ट गाइड बनकर, वो नहीं थमते थे। पटना में एक दिन, परमिट के लिए जब उनका आवेदन कमिश्नर के सामने पहुँचा, तो वह सिर्फ इसलिए बताया कि उनके पास स्वतंत्रता सेनानी का प्रमाणपत्र नहीं है। इसके बाद उन्होंने अपने परिवारवालों से कहा, "कभी सोचा नहीं था कि वो दिल्ली, जहाँ मैंने बम फेंका था, वहीं मेरी मौत होगी, पर स्ट्रेचर पर पड़ा हुआ।" कुछ समय बाद, जब राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को इसका पता लगा तो उन्होंने माफी मांगी थी। 1963 में उन्हें विधान परिषद का सदस्य बनाया गया, लेकिन उसके बाद उनकी चुप्प बरकरार रही। 1964 में जीवन के अंतिम दिनों में, बटुकेश्वर दिल्ली के सरकारी अस्पताल में कैंसर के खिलवाड़ से जूझ रहे थे। उन्होंने अपने परिवारवालों से कहा, "मेरी इच्छा है कि मेरा अंतिम संस्कार भगत सिंह की समाधि के पास हो।" 17 जुलाई को उन्हें कोमा में डाल दिया गया और 20 जुलाई 1965 की रात उनका देहांत हो ...

शालू की शायरी

मेरी कहानी में अब भी तेरा किस्सा है..  की मेरी कहानी में अब भी तेरा किस्सा है.. दिल टूटा हुआ है पर उसमें भी तेरा हिस्सा है...! -'Sneha' जीने की कोई वजह नहीं... जाने क्यों जिये जा रही हूँ.. मैं ये गुनाह क्यों बार बार किये जा रही हूँ.. मौत से कोई वास्ता नहीं है मेरा.. फिर भी ना जाने क्यों.. मै मौत की ख्वाहिश किये जा रही हूँ..!! ************************** "तू अगर कह दे तो तेरे इंतज़ार में रातें बिताऊंगी,   करूँगी अपने इश्क़ का इज़हार, तुझे रात भर जगाऊंगी।   हक़ीक़त में ना सही, पर तुझे ख्वाबों में अपना बनाऊँगी,   तू किसी और का सही, मैं फिर भी तेरे सपने सजाऊंगी।" ************************** चलो मर जाते हैं तुम पर। बतायो सीने में दफ़नायोगे क्या?  ************************** चलो तेरे इश्क में पड़ जाते हैं, दिल की गहराइयों में, खो जाते हैं। ************************** सितारों के बिना चाँद भी कहाँ पुरा लगता है, तेरे बिना हर पल हर लम्हा अधूरा लगता है। और ये तो तेरी यादें इतनी प्यारी हैं, की तू अपना सा लगने लगता है, वरना ल...