बहुत दिन बीते यादों मे तेरी... तुझे क्या क्या बताऊँ..?
अब जो तु लौट रहा है, तुझे अपनी कहानी कहाँ से सुनाऊँ..?
तु रह वही जहाँ था..
क्योंकि नहीं रही आरज़ू की अब मैं तुझे अपना बनाऊँ..!! नहीं फुरसत मुझे की अपनी कहानी भूल... तेरे किस्से सुलझाऊँ..!
दिल भूलना चाहता है.. पर मैं तुझे कैसे भूल जाऊँ..?
तु किसी और का हो कर लौटा... तु ही बता मैं तुझे कैसे अपना बनाऊँ..?
दिल कहता है तुझे बहुत सताऊं... तुझे भी उतना रुलाऊँ..!
तु खुश है पर मैं खुद को कैसे हसाऊँ..?
तु जो लौट रहा है तुझे अपनी कहानी कहाँ से सुनाऊँ..??
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