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तुझे क्या-क्या बताऊँ?

बहुत दिन बीते यादों मे तेरी... तुझे क्या क्या बताऊँ..? अब जो तु लौट रहा है, तुझे अपनी कहानी कहाँ से सुनाऊँ..? तु रह वही जहाँ था.. क्योंकि नहीं रही आरज़ू की अब मैं तुझे अपना बनाऊँ..!! नहीं फुरसत मुझे की अपनी कहानी भूल... तेरे किस्से सुलझाऊँ..! दिल भूलना चाहता है.. पर मैं तुझे कैसे भूल जाऊँ..? तु किसी और का हो कर लौटा... तु ही बता मैं तुझे कैसे अपना बनाऊँ..? दिल कहता है तुझे बहुत सताऊं... तुझे भी उतना रुलाऊँ..! तु खुश है पर मैं खुद को कैसे हसाऊँ..? तु जो लौट रहा है तुझे अपनी कहानी कहाँ से सुनाऊँ..??

शालू की शायरी

मेरी कहानी में अब भी तेरा किस्सा है..  की मेरी कहानी में अब भी तेरा किस्सा है.. दिल टूटा हुआ है पर उसमें भी तेरा हिस्सा है...! -'Sneha' जीने की कोई वजह नहीं... जाने क्यों जिये जा रही हूँ.. मैं ये गुनाह क्यों बार बार किये जा रही हूँ.. मौत से कोई वास्ता नहीं है मेरा.. फिर भी ना जाने क्यों.. मै मौत की ख्वाहिश किये जा रही हूँ..!! ************************** "तू अगर कह दे तो तेरे इंतज़ार में रातें बिताऊंगी,   करूँगी अपने इश्क़ का इज़हार, तुझे रात भर जगाऊंगी।   हक़ीक़त में ना सही, पर तुझे ख्वाबों में अपना बनाऊँगी,   तू किसी और का सही, मैं फिर भी तेरे सपने सजाऊंगी।" ************************** चलो मर जाते हैं तुम पर। बतायो सीने में दफ़नायोगे क्या?  ************************** चलो तेरे इश्क में पड़ जाते हैं, दिल की गहराइयों में, खो जाते हैं। ************************** सितारों के बिना चाँद भी कहाँ पुरा लगता है, तेरे बिना हर पल हर लम्हा अधूरा लगता है। और ये तो तेरी यादें इतनी प्यारी हैं, की तू अपना सा लगने लगता है, वरना ल...