थोड़ी सी झल्ली हूँ मैं.. बताओ मुझे संभाल पाओगे क्या..
स्वाभिमानी हूँ मैं बहुत... तुम मेरे स्वाभिमान की रक्षा कर पाओगे क्या..
Cafe, restaurant तो सब जाते हैं.. तुम मेरे साथ मंदीर चल पाओगे क्या..
हाँ मानती हूँ थोड़ी नादान हूँ मैं... तुम मेरी नादानियों को समझ पाओगे क्या..
बहुत बड़ी खवाहइशें नहीं है मेरी .. तुम मुझे झुमके दिला
पाओगे क्या...
अगर थामा है मेरा हाथ तो जिंदगी भर मेरा साथ निभा पाओगे क्या...???
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