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हाथों में भी अपना हाथ: शायरी कलम से

"कभी मेरे हाथों में भी तो अपना हाथ डाल के देख जरा,
ये दिल मांगे तुझसे, रिश्तों का सफर बना के देख जरा।

जो बातें होती थीं सिर्फ शब्दों की, अब वही बातें कहने का समय है,
मेरी आँखों में तेरे साथ बिताए हर पल की चाहत है।

तू मेरी जिंदगी का हर सवाल का जवाब है,
इस रिश्ते को मेरे दिल के पास बुला के देख जरा।"

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